बने व्याधि के पूत, हाँफते पीकर गाँजा

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

गाँजा-चरस-अफीमची,बन सिकुड़ी है खाल|
जब-बंधन की खाट पर, ठोक रहे भ्रम-ताल||
ठोक रहे भ्रम-ताल, काल के आगे हँसकर|
सोख रहे निज रक्त, दंभ की मग में बस कर||
कह "नायक" कविराय, बज गया इनका बाजा|
बने व्याधि के पूत, हाँफते पीकर गाँजा||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

Views 99
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बृजेश कुमार नायक
Posts 131
Total Views 29.4k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी, निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र. सम्पर्क9455423376whatsaap9956928367

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia