बदली हुई हवा है

umesh mehra

रचनाकार- umesh mehra

विधा- गज़ल/गीतिका

बदल रही है देश की तकदीर धीरे-धीरे ।
फहरा रहा है हिन्द का तिरंगा धीरे-धीरे ।।
——*——*——*——
उन्नती भी होगी वन्दे मातरम् भी होगा ।
नोट बंदी भी होगी सेना का शौर्य होगा ।।
बदली हुई फ़िजा में साँस ले रहे हैं धीरे-धीरे ।
——*——*——*——
पाक हो या चायना ऑख मत तरेरना ।
जख्म हैं अभी हरे उन्हे मत कुरेदना ।।
बाजुओ के दम को समझ रहे है धीरे-धीरे ।
——-*——*——*——-
धरती भी बेच डाली आशमा को बेच डाला ।
ऑख वो मूंदे रहे होते रहे रोज़ घोटाला ।।
बे-इमान बालों की धरती खिसक रही है धीरे-धीरे ।।
——-*——*——*——-
हिन्द की तरक्की में सबका विकास होगा ।
जाती धर्म के नाम पर न कोई भेदभाव होगा।।
संवर रहा है हिन्द का गुलिस्ता धीरे-धीरे ।
——*——*——*——-
धर्म के नाम पर दिलों में बना दी दूरियां ।
चंद वोटों के लिए खूब सेक ली रोटियां ।।
तुस्टीकरण बालों को पहचान गये हैं धीरे-धीरे
——*——*——*——-
उमेश मेहरा
गाडरवारा (मध्य प्रदेश )
9479611151

Views 16
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
umesh mehra
Posts 13
Total Views 284

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia