बदली हुई हवा है

umesh mehra

रचनाकार- umesh mehra

विधा- गज़ल/गीतिका

बदल रही है देश की तकदीर धीरे-धीरे ।
फहरा रहा है हिन्द का तिरंगा धीरे-धीरे ।।
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उन्नती भी होगी वन्दे मातरम् भी होगा ।
नोट बंदी भी होगी सेना का शौर्य होगा ।।
बदली हुई फ़िजा में साँस ले रहे हैं धीरे-धीरे ।
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पाक हो या चायना ऑख मत तरेरना ।
जख्म हैं अभी हरे उन्हे मत कुरेदना ।।
बाजुओ के दम को समझ रहे है धीरे-धीरे ।
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धरती भी बेच डाली आशमा को बेच डाला ।
ऑख वो मूंदे रहे होते रहे रोज़ घोटाला ।।
बे-इमान बालों की धरती खिसक रही है धीरे-धीरे ।।
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हिन्द की तरक्की में सबका विकास होगा ।
जाती धर्म के नाम पर न कोई भेदभाव होगा।।
संवर रहा है हिन्द का गुलिस्ता धीरे-धीरे ।
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धर्म के नाम पर दिलों में बना दी दूरियां ।
चंद वोटों के लिए खूब सेक ली रोटियां ।।
तुस्टीकरण बालों को पहचान गये हैं धीरे-धीरे
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उमेश मेहरा
गाडरवारा (मध्य प्रदेश )
9479611151

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