बताओ तो !

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- मुक्तक

दिल को कोई ठोकर लगी,,,,,,,,, बताओ तो !
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इश्क था या दिल की ठगी,,,,,,,,, बताओ तो !
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तेरे दिल से जो निकले जाना तेरे आशिक हजार निकले !
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सच ? तेरी आदत है दिल्लगी,,,,,,,,, बताओ तो !
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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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