बडा ऊंचा समझते हो अपना कद नही देखा

Vindhya Prakash Mishra

रचनाकार- Vindhya Prakash Mishra

विधा- कविता

बडा ऊंचा समझते है अपना कद नही देखा
पकड बडी ही कहते हो अपना जद नही देखा।
लगता है सरोवर को बडा हूं मै भी सागर से
मेढक है कुएं के जो गहरा नद नही देखा।
पर्वत है नाप लो ऊंचाइयां अपनी
पता चल जाएगा क्या हो अभी तक हद नही देखा।
बडो का साथ कर लो तुम कुछ सीख उनसे लो
पाप की गठरी से तौला है धर्म की आमद नही देखा।
बडी लडाइयां समझे हो मेरे और खुद के बीच
तनाव युद्ध का देखो भारत पाक सरहद नही देखा ।

विन्ध्यप्रकाश मिश्र

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