बड़ो से कर ली दोस्ती, तो कोई बड़ा नहीं होता

आलोक प्रतापगढ़ी

रचनाकार- आलोक प्रतापगढ़ी

विधा- शेर

बड़ो से कर ली दोस्ती, तो कोई बड़ा नहीं होता।
मुकद्दर बदलने के वास्ते कोई खड़ा नहीं होता।।

समुद्री लहरों से सीख लो, बढ़ना और घटना।
कि वक्त बदलता है पलभर में, और बड़ा हमेशा ही बड़ा नहीं होता।।

आलोक प्रतापगढ़ी

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कवि आलोक सिंह प्रतापगढ़ी

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