बचपन अच्छा था

Dr ShivAditya Sharma

रचनाकार- Dr ShivAditya Sharma

विधा- कविता

बचपन अच्छा था, मालामाल थे
अब तो भरी जेब में भी फकीरी है
खरीद ना पाएं समय खुद के लिए
किस काम की ऐसी अमीरी है

खुश थे, लगती थी जो कामयाबी हमें
लग गई कब अपनी ही बोली पता ना चला
खुशी खरीदने में औरों की
खुद खर्च हो गए कब पता ना चला

खर्च हुए तो सोचा दोस्तों

जब इतनी ही खुदगर्ज है जिंदगी
तो दूसरों के लिए मर मर के जीना
क्या जरूरी है?

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Dr ShivAditya Sharma
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Consultant Endodontist. Doctor by profession, Writer by choice. बाकी तो खुद भी अपने बारे में ज्यादा नहीं जानता, रोज़ जिन्दगी जैसी चोट करती है वैसा ही ढल जाता हूँ।

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