*** फेसबुक अब हमें तेरा एतबार ना रहा ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

आज मित्रता दिवस पर सभी जाने अनजाने फेसबुक मित्रों को शुभकामनाओं के साथ ये गीत भेंट
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दोस्त दोस्त ना रहा
यार यार ना रहा
फेस बुक अब हमें
तेरा एतबार ना रहा
बने थे बडे शोक से
वो मेरे मीत तुम ही थे
तुम्ही तो थे तुम्ही तो थे
वो तेरा मेरा साथ अब
यादगार ना रहा ना रहा
फेस बुक अब हमें
तेरा एतबार ना रहा
एतबार ना रहा
जो कि थी हमनें मैसेंजर पर
बडी थी रोचक बातें मगर
वो मेरे दोस्त तुम ही थे
तुम्ही ना थे तुम्ही ना थे
इस बात का अब हमें
ज्यादा अफ़सोस ना रहा
फेसबुक अब हमें तेरा
एतबार ना रहा
एतबार ना रहा
वो की थी दिल जोड़कर
बातें बहुत ही रोचक मगर
अचानक ये दिल तोड़कर
अकेला मुझ को छोड़कर
चले गये थे जो हमसफ़र
वो मेरे दोस्त तुम ही थे
तुम्ही तो थे तुम्ही तो थे
फेस बुक अब हमें
तेरा एतबार ना रहा
एतबार ना रहा
अभी भी है अगर मगर
सूना है फेस बुक नगर
आ जाओ बन के मेहमां
दिल का है खाली नगर
दिल का है खाली नगर
ढूंढूं मैं अब तुझको किधर
सूना है अब फेसबुक नगर
सूना है अब फेसबुक नगर
दोस्त दोस्त ना रहा
यार यार ना रहा
फेस बुक अब हमें
तेरा एतबार ना रहा
मेल- फिमेल के फेर में
आने लगे मुझको चक्कर
जाने अनजाने में हम
दे किसको प्रेम-टक्कर
किसको खिलाये हम
जीत की ये शक्कर
जीत की ये शक्कर
दोस्त दोस्त ना रहा
यार यार ना रहा
फेस बुक अब हमें
तेरा एतबार ना रहा
एतबार ना रहा ।

👍 मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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