फूल खारों में मुस्कुराते हैं

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- कविता

आप ख़ाबों में जब भी आते हैं ।
सोनेे देते नही सताते हैं ।।

दिल मिरा बस तड़प के रह जाता ।
दूर हमसे जो आप जाते हैं ।।

प्यार मेरा उन्हें रुलाएगा ।
आज़ जैसे हमें रुलाते हैं ।।

जो दिवाने असल में होते हैं ।
जख़्म खाते हैं मुस्कुराते हैं।।

हम निभाते वफ़ा को मर के भी ।
दिल किसी से अगर लगाते हैं ।।

तोड़ कर दिल गया है वो जब से।
बोझ जख़्मों का हम उठाते हैं ।।

दिल जला कर सुकूँ न पाते वो।
जब्त को मेरे आज़माते हैं ।।

दफ़्न सीने में हसरतें मेरी ।
अश्क़ फिर भी नहीं बहाते हैं ।।

राह में जो मिला मुझे हँस कर।
साथ सबका ही हम निभाते हैं ।।

जख़्म खाकर भी हँस रहा हूँ मैं ।
देख वो खूब तिलमिलाते हैं ।।

जो भटकने लगे हैं राहों से।
राह उनको सही दिखाते हैं ।।

मैं भला खुश न क्यूँ रहूँ "प्रीतम"।
फूल खारों में मुस्कुराते हैं ।।

Views 1
Sponsored
Author
Pritam Rathaur
Posts 34
Total Views 91
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia