फिल्मों वाले अपराधी !

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- मुक्तक

फुटपाथों पर सोने वाले, आज खून के आंसू रोते,
समझ गये हैं फिल्मों वाले, नही कभी अपराधी होते,
समझ गये हैं पैसे वालों, का रुतबा अब भी कायम हैं
आम आदमी घिसता पिटता, बूढ़ा सा बेबस-बेदम हैं !

– नीरज चौहान

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Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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