फिर पांच दोहे ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रचनाकार- रकमिश सुल्तानपुरी

विधा- दोहे

बादल/ घन मेघ

सूरज डूबा था नही,,,,,,,दोनों मद मे चूर ।
भिगो रहे थे धूप को, बादल निष्ठुर क्रूर ।।

बादल पंछी बन चुने,,,,,,,,, तारे सारी रात ।
आसमान की डाल पर,, बैठ करे बरसात ।।

व्यथा धरा की देखकर,,,घन बरसे घनघोर ।
बिजली नेह बिछोह से, तड़प रही चहुँओर ।।

ओढ़ कपासी मेघ नभ,, सूरज करे शिकार ।
इंद्रधनुष को देखकर, भावुक हुआ बिमार ।।

हरियाली हँसने लगी , पुष्पित जीवन जीव ।
तृप्त हुये वन,बाग़ सब, नदियां हुई सजीव ।।

राम केश मिश्र
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

Sponsored
Views 11
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
रकमिश सुल्तानपुरी
Posts 97
Total Views 1.7k
रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia