फिर उसे मेरी याद आ रही होगी – कुमार विश्वास

MridulC Srivastava

रचनाकार- MridulC Srivastava

विधा- कविता

आप आये या बाहर आई नव जीवन नई चाँदनी साथ लाई,तोड़ ही चुके थे इस रंग से नाता,नई चमक,नव अनुभव साथ लाई
फिर उसे मेरी याद आ रही होगी
फिर वो दीपक बुझा रही होगी
आकर फेसबुक पर मेरे, आ कर फेसबुक पर मेरे,
हर पोस्ट में खुद को तलाश रही होगी
चूम कर अपने बेटे का माथा,चूम कर अपने बेटे का माथा
वो मुझ को ही टीका लगा रही होगी…
फिर उसे मेरी याद आ रही होगी,फिर कही वो दीपक बुझा रही होगी,फिर कही वो दीपक बुझा रही होगी
जब कभी भी छुआ होगा उसने उसे
ये बात खुद से ही छुपा रही होगी,फिर आज उसे मेरी याद आ रही होगी.
आंखियो के झरोखों से फिर देखो जो,
पूरी कायनात मुझे तुमसे ही मिला रही होगी
फिर उसे मेरी ही याद आ रही होगी,
💕फिर कहीं वो दीपक बुझा रही होगी💕

कुमार विश्वास + सम चेंजेज मेड इन माय फेवर

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MridulC Srivastava
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हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे, इस माटी का कोई मोल नहीं

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