फिर आऊँगा ….

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

रचनाकार- मुकेश कुमार बड़गैयाँ

विधा- कविता

मैं नाम बदल फिर आऊँगा !
किसी दरख्त का फूल बनकर
अंबर का तारा बनकर- – –
तितलियों सा रंग-बिरंगा—
जंगल में मंगल करने
हिरन जैसा चंगा-बंगा!
झर-झर करता झरने सा बहता
मैं फिर आऊँगा—
मैं आज जँहा हूँ
कल वहाँ फिर आऊँगा!
मैं नाम बदल फिर आऊँगा।

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मुकेश कुमार बड़गैयाँ
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I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.

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