फासला भी हुआ है

ashok ashq

रचनाकार- ashok ashq

विधा- गज़ल/गीतिका

अदावत हुई फासला भी हुआ है
वफ़ा का अभी सिलसिला चल रहा है

कहें हाल कैसे खुदाया बता दे
मुहब्बत यहाँ कब मुकम्मल हुआ है

उतर जो गया इश्क़ के ही भँवर में
भला फिर उसे भी किनारा मिला है

जमाना जिसे उम्र भर है सताया
वही नाम अपना फलक पर लिखा है

अगर रोकना है मिरी साँस रोको
दिवाना तिरा दर तुम्हारे खड़ा है

अगर हो इजाजत चलूँ यार घर को
मिरी माँ को बस इक मिरा आसरा है

न नफरत किसी से मुहब्बत सभी से
रकीबों सा फिर भी जमाना हुआ है

न देना नसीहत कभी 'अश्क़' मुझको
वफ़ा पर मिरी तो ख़ुदा भी झुका है

– 'अश्क़'

Views 6
Sponsored
Author
ashok ashq
Posts 4
Total Views 24
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia