फाल्गुन

Neelam Naveen

रचनाकार- Neelam Naveen "Neel"

विधा- गीत

वो सारी वर्जनायें
तोड़ कर नाचने दे
झूम झूम कर आज
गाने दे कोई राग
मुझको भी सजाने दे साज ।

भुली मैं सारी की सारी
दुनिया की दुनियादारी
फुलो की चादर में पांव रख
मुझको भी लहलहाने दे आज ।

कहीं मेरे  सुर  जगा दे
सदियों से सोये भंवर को
फिर से कोई तान छेड़े कि
मुझको भी मीरा बनने दे आज ।

वो रंगो के काफिले
वो गीत रचते हौल्यार
ढोल,मृंदग की थाप पर
मुझको भी होली मनाने दे आज

वो मधुवन सी खुश्बु
वो मुरली की  धुन
वो काली यमुना का तट
मुझको भी कान्हा को रटने दो आज ।

आती जाती पुरवाईयां
मुझमें सिहरन भरती हैं
सुनकर नयी कोपलों की बातें
मुझको भी खिलने  जाने दो  आज ।

भांग भंगीरे में मदमस्त
कहीं मल्हार भी सजाते हैं शगुन
कुछ पल मेरी पीड़ा से परे
आज मुझको भी  गा लेने दो फाल्गुन ।
नीलम नवीन "नील"
26/2/17

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Neelam Naveen
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शिक्षा : पोस्ट ग्रेजूऐट अंग्रेजी साहित्य तथा सोसियल वर्क में । कृति: सांझा संकलन (काव्य रचनाएँ ),अखंड भारत पत्रिका (काव्य रचनाएँ एवं लेख ) तथा अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । स्थान : अल्मोडा

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