फागुन

Rajni Ramdev

रचनाकार- Rajni Ramdev

विधा- घनाक्षरी

हाथन भरे हैं रँग, …….सखियन के हैं सँग
फागुन को हुड़दंग,……….होली खेलन लगे
भर पिचकारी मारी, भिगो दीन्ही मोरी सारी
बात तो मानो हमारी, ……..काहे ठेलन लगे
उड़ रहो है गुलाल, …..आसमान हुआ लाल
फैलावत कान्हा जाल, …सखी पकडन लगे
शिकायत करें सखीं, …जसुदा के बात रखी
लाला तेरा करे दुखी,……फिर अकड़न लगे
#रजनी

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Rajni Ramdev
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रजनी रामदेव जन्मस्थान कानपुर बी एस सी (मैथ्स) पति--एस एन रामदेव शौक--गद्य , पद्य लेखन,गायन और साहित्य पठन कुछ फेसबुक के साहित्यिक ग्रुप्स में सम्मान तथा कुछ रचनाएँ प्रकाशित

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