फर्क

Shubha Mehta

रचनाकार- Shubha Mehta

विधा- कविता

बंगले में रहने वाली
मेमसाब से
पूछा महाराज ने
आज क्या बनेगा ?
पालक पनीर या शाही पनीर
बिरियानी और खीर ?
मेडम बोलीं
बना लो सभी कुछ ।
उधर झोंपडी में भी
प्रश्न वही था
आज क्या बनेगा?
जाकर देखूं रसोई में
कुछ है क्या?
थोडे से चावल या आटा
मिट जाए भूख
जिससे आज भर की ।

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Shubha Mehta
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5 comments
  1. बहुत सुंदर कविता। 👌

    दोनों घरों में भूख मिटाने की जंग है,
    फ़र्क़ है तो बस इतना कि ,
    कहीं हाथ में है जग ,
    और , कहीं हाथ तंग है।