**** प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश ****

Raju Gajbhiye

रचनाकार- Raju Gajbhiye

विधा- कहानी

सर ! आपका संस्थान का प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश यह विज्ञापन पढ़ा है | आप प्रबंधन , फोटोग्राफी , मल्टीमीडिया ,
साफ्टवेअर , हार्डवेअर , पत्रकारिता , फैशन , कॉल सेंटर आदि विभिन्न प्रकार के कोर्स में दाखिला देते है | जया ने सवाल किया |

स्वागतकक्ष से एक सुन्दर वाकपटुता ने संस्थान का परिचय देते हुए कहा हमारा संस्थान प्रोफेशनल कोर्स में अग्रणी है |
नए – नए कोर्स है , रोजगार की १०० प्रतिशत ग्यारंटी है जी | आपको इंटरशिप , ट्रेनिंग , शिविर , शैक्षणिक यात्राएं
एव सुसज्जित लेब , लायब्रेरी सभी उपलब्ध है | बस आप प्रवेश लीजिये जी |

जया मन में सोच रही थी की संस्थान का भव्य ऑफिस , कोर्स की रंगबिरंगी जानकारि पूस्तिका कलर पेपर में ऑफिस के
हर टेबल पर एलसीडी , कंप्यूटर लगे हुए है | इन्टरनेट ब्राड बैंड कनेक्शन से सज्ज |

जया ने संस्था में दाखिला लिया | दाखिला के साथ ही फॉर्म एव जानकारी पुस्तिका के रुपये १००० की रशीद हाथ में दी गयी |
जया को लगा इतनी बड़ी संस्था है , फॉर्म के रुपये देना ही है |

संस्थान के जानकारी पुस्तिका में सभी कोर्स की फीस भी सर्वसाधारण आम आदमी की हैसियत से ज्यादा थी |
जया भी मध्यम परिवार से थी | लेकिन कोर्स करते ही १०० प्रतिशत रोजगार ग्यारंटी यह कारण से आकर्षित
थी | एक बार रोजगार मिल जाये तो मैं भी अपने पैरो पर खड़ी हो सकती हु , लड़की हु तो क्या हुआ ?

माता-पिता की परस्शिति नहीं होने के बावजूद जया ने संस्थान में प्रवेश लिया | फिर सिलसिला शुरू हुआ
इंटरशिप के पैसे भरो , ट्रेनिंग के पैसे भरो , शैक्षणिक यात्राएं के पैसे भरो और हर महीने कोर्स फ़ीस जमा करना अनिवार्य |
जया को रुपये देते – देते दिन में तारे नजर आने लगे |

संस्थान की अव्यवस्थाएं देखकर तो किसको क्या बताना यही समझ के बहार था | क्योंकी जो जानकारी
पुस्तिका में था उसके विपरीत सबकुछ था | ना बैठने की व्यवस्थाएं थी , ना पीने की पानी की व्यवस्था इसी से
अंदाजा लगाया जा सकता है की लेब व् लायब्रेरी हो सकती है ? ना सबंधित विषयो के शिक्षकगण |

जया को परीक्षा में बैठने का प्रवेश पत्र आया | दूसरे ही दिन संस्थान को रोख लगा दी गयी की संस्थान
को मान्यता नहीं है | सभी परीक्षार्थी को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाता है | जिसमे जया का भी नाम था |
सुनते ही जया को चक्कर आने लगे | माता-पिता ने मार्केट से रुपये उधार लिए है उसका क्या होगा | दूसरे
छात्र -छात्राये परेशांन नजर आ रहे थे | लेकिन बड़े घर के छात्र – छात्राये ज्यादा चिंतित नजर नही आ रहे थे
उनको जानकारी थी की और ज्यादा रूपये देकर हमें तो परीक्षा में बैठमे से वंचित नहीं कर सकते है |

जया को लुभावने व्यावसायिक कोर्स की ठगी की ठोकर लग गयी थी | उसे ' नए ज़माने के नए कोर्स का
जोर का झटका धीरे से लगे ' यह कहावत याद आने लगी | जया सबको बताने लगी , संस्थान की
सम्पूर्ण जानकारी ले लो | फीस सवलत आदि जानकारी अवश्य ले | संस्थान मान्यता प्राप्त , संलग्नता है
या नहीं यह देख लेना आवश्यक है |

मैं तो व्यवसाहिक कोर्स से ठग गयी लेकिन दूसरे को भी ठगी का शिकार नहीं होने दूँगी यह निर्णय लेकर
वह मिडिया के पास गयी | कैसे पुरे साल पढने – पढ़ाने के बाद परीक्षा निकट आते ही बिना कारण बताये
छत्रो का प्रवेश पत्र रोख लिया जाता है | कारण , वही मनमानी वसूली | धन मिलने पर ही प्रवेश पत्र
दिया जाता है | कारण कक्षा में कम उपस्स्थिति बताने जैसा घिसापिटा बहाना ही बताया एव मेडिकल
सर्टिफिकेट लगाना बताना इस प्रकार की ब्लैक मेलिंग सक्ति से चलती है | जया ने जोर देकर कहा
दोस्तों प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश लेने से पहले रहे सावधान | और शिकायत दर्ज करने से पीछे भी नहीं रहे |
०००
– राजू गजभिये
दर्शना मार्गदर्शन केंद्र , बदनावर जिला धार ( मध्य प्रदेश )

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Raju Gajbhiye
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परिचय - मैं राजू गजभिये , मूलतः यवतमाल ( महाराष्ट्र) मातृभाषा मराठी , वर्तमान में बदनावर जिला धार (मध्य प्रदेश ) कश्यप स्वीटनर्स लिमिटेड में कार्यरत | किताबे पढना एव लेखन | अपितु लिखने का शौक है | व्यग , लेख , कहानी , कविताये , लघुकथा और सामाजिक मुद्दों पर भी लेखन | विज्ञानं साहित्य आदि पर निरंतरता लिखने की कोशिश जारी है | समय-समय पर प्रतिष्टित समाचार - पत्रो , पत्रिकाओ में प्रकाशित होती रहती

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