प्रेरणा

जगदीश लववंशी

रचनाकार- जगदीश लववंशी

विधा- कविता

तुम हो जीने की प्रेरणा,
देती हो एक नई प्रेरणा,
जब से मिला तुम्हारा साथ,
एक पल भी छूटा न हाथ,
गुजर गए चौदह सावन,
तेरा प्यार मिला पावन,
एक नीरस को बनाया मधुर,
मिली चेतना गीत गाते अधर,
चैतन्य हुआ तुम्हारा यह जग,
खुशी रही जहाँ पड़े तुम्हारे पग,
सुनाई देते जब मीठे मीठे बोल,
ऐसे प्रेम प्यार का नही कोई मोल,
जीवन के रथ के दो पहिये अनमोल,
साथ चले बढ़ता अपना मेलजोल,
गुड्डी गुड़ियों सा हो जीवन सरल,
अविश्वास का न घुलने पाये गरल,
।।।।।जेपीएल।।।।

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जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) & MSC (MATHS) "कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और तारे सभी को कविता में ही खोजना तब मन में असीम शांति का अनुभव होता हैं"

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