प्रेयसी

जगदीश लववंशी

रचनाकार- जगदीश लववंशी

विधा- कविता

कितना अच्छा हैं तुम्हारा चरित्र,
मन से नहीं मिटता तुम्हारा चित्र,
प्यार और स्नेह कि तुम हो मूरत,
कितनी भोली हैं तुम्हारी सूरत,
जब मैंने तुमको देखा था ,
सच्चा मित्र मैंने पाया था,
मित्रता कि तुम थी मिसाल,
हृदय तुम्हारा था विशाल,
कदम कदम पर मिला तुम्हारा साथ, मुश्किलों में भी नहीं छोड़ा तुमने हाथ,
तुमने बिना बोले निकालें बरस सात ,
मैं नहीं भूला तुम्हे चाहे दिन हो या रात,
बचपन की यारी ,थी कितनी गहरी,
सपनों की तुम, थी मेरी प्यारी परी,
जग में रहो कहीं भी खुश रखेगा ईश,
नहीं भूलेगा कभी तुमको यह जगदीश,
।।जेपीएल।।।

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 3
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
जगदीश लववंशी
Posts 29
Total Views 343

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia