प्रेम (3)

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

कितना ज़रूरी है,
किसी कली को
पनपने के लिए,
किसी और कली
का फूल बनना ,
फिर मुरझाना और
फिर डाली से
विलग होकर
भूमि पर गिर,
नष्ट कर देना
अपना समूचा अस्तित्व ?
क्या ? कभी
किसी ने भी
सोचा है,तनिक भी
गहराई से कि-
इस समूची प्रक्रिया में,
कितनी करूणा है ?
कितना प्रेम है. ?
-ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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2 comments
  1. फूल बनकर मुस्कुराना जिंदगी है।
    मुस्कुरा के गम भुलाना जिंदगी है।
    मिली कर लोग खुश होते हैं तो क्या,
    बिना मिले दोस्ती निभाना जिंदगी है।