प्रेम में मीरा बनी मैं

Ananya Shree

रचनाकार- Ananya Shree

विधा- गज़ल/गीतिका

1=गीतिका छंद

प्रेम में मीरा बनी मैं, प्रेम में ही राधिका!
प्रणय करती हूँ कभी मैं, अरु कभी हूँ साधिका!
होंठ से जब जब लगूँ मैं, बाँसुरी की धुन बनूँ!
अंग से लिपटी रहूँ अरु, प्रीत के मुक्तक चुनूँ!

अनन्या "श्री"

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Ananya Shree
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प्रधान सम्पादिका "नारी तू कल्याणी हिंदी राष्ट्रीय मासिक पत्रिका"

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