प्रेम बनो,तब राष्ट्र, हर्षमय सद् फुलवारी||

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- कुण्डलिया

फुलवारी में फूलते, बहु रंगों के फूल|
पवन चली,चुंबन सहित,बने प्रीतिमय चूल||
बने प्रीतिमय चूल ,सदा हँसते-इठलाते|
हिल-मिलकर सद्भाव, नेह का पाठ पढ़ाते||
कह "नायक" कविराय, ज्ञान गह,द्वंद मदारी
प्रेम बनो,तब राष्ट्र, हर्षमय सद् फुलवारी||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 94
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Brijesh Nayak
Posts 123
Total Views 18.9k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia