प्रेम बनो,तब राष्ट्र, हर्षमय सद् फुलवारी||

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

फुलवारी में फूलते, बहु रंगों के फूल|
पवन चली,चुंबन सहित,बने प्रीतिमय चूल||
बने प्रीतिमय चूल ,सदा हँसते-इठलाते|
हिल-मिलकर सद्भाव, नेह का पाठ पढ़ाते||
कह "नायक" कविराय, ज्ञान गह,द्वंद मदारी
प्रेम बनो,तब राष्ट्र, हर्षमय सद् फुलवारी||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

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