प्रेम की कहानी

Rishav Tomar (Radhe)

रचनाकार- Rishav Tomar (Radhe)

विधा- गज़ल/गीतिका

मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा है,
कभी खुल के हँस रहा है कभी छुप के रो रहा हैं
ये प्यार में तुम्हारे पतझड़ सा हो गया है
ये सूखता हुआ एक,पत्ते सा टूटता हैं
मेरे प्यार की कहानी मेरा दिल सुना रहा है
कभी रो रहा है ज़ालिम कभी मुझपे हँस रहा हैं
तुम्हें गुलाब कह रहा है,खुद झाड़ हो गया हैं
तेरे बिना ओ मेरे साथी,दिल दर्द हो गया हैं
पतझड़ में कोई झड़ते पत्ते सा झड़ गया है
मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा है
तुम तेहरती हो हरपल,जिसमे नहा रही हो
वो कोई नही है दरिया,आँखे है मेरी साथी
तुम बिन तड़प रही है,तुम बिन ये बह रही हैं
मेरे प्यार की कहानी मेरा दिल सुना रहा है
मेरा तेरे दिल से साथी है जनम जनम का
रिश्ता
कान्हा का जैसे राधा से है कोई रिश्ता
वैसे ही मेरे साथी तुमसे मेरा है रिश्ता
मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा हैं
तुम्हे दीपक बता के साथी,बात्ती सा जल रहा हैं
तुम्हें चाँद जैसा कह कर,चाँदनी बिखेरता है
मेरे प्यार की महक सुन,जज्बात तुम बनी हो
गीतों में जो समाये अहसास तुम हुई हो
मेरे प्यार की कहानी मेरा दिल सुना रहा हैं
मैं राख हो रहा हूँ वो खाक बन गई
तेरे बिन गुजरे पल में मैं पीर हो गया हूँ
महलो में जैसे बिता बिन तेरे मेरे साथी
उर्मिला के बीते पल जैसा हो गया हूँ
मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा है
सर पर न हाथ कोई,गम में न साथ कोई
मेरा दिल गरीब तनहा आंशू बहा रहा हैं
गुमनाम सा ये होकर बेचैन हो रहा है
तेरे गम उठा रहा हैं, खुद को जला रहा है
मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा हैं
मैं यूँ ही न रो पड़ा हूँ यूँ ही न हँस रहा हूँ
बेचैन हो के साथी यूँ ही न गा रहा हूँ
तेरी याद के सहारे थोड़ा सम्भल रहा हूँ
मैं थोड़ा हँस रहा हूँ,मैं थोड़ा मचल रहा हूँ
बस ये लगा है मुझको वो मुझे मना रही हैं
मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा है
सारे जहाँ की मस्ती थोड़ी सी लग रही
है
उन सात आसमा की बुलंदी भी आज है कम
जो आश बंध गई है वो मुझे बुला रही है
मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा है
मेरे दिल न जाने क्यों अब बेखबर सा हो रहा है
मिलने को तड़पता है, उनको बुला रहा हैं
कोई ख्याब मुझे साथी रातो को जगा रहा है
मुझे आज शाम से वो याद आ रहा हैं
ऋषभ तोमर (राधे)

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Rishav Tomar (Radhe)
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ऋषभ तोमर पी .जी.कॉलेज अम्बाह मुरैना बी.एससी.चतुर्थ सेमेस्टर(गणित)

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