प्रेम का बाग़

MANINDER singh

रचनाकार- MANINDER singh

विधा- गज़ल/गीतिका

तलाश रहे है लोग वजह मुस्कुराने की,
टूटे हुए रिश्तो को फिर से निभाने की,,

अंजाने में हुई अपनों से भूलो को भूल,
चेष्टा मे हर कोई अपनों को मनाने की,,

दिलो में प्रेम ही प्रेम इक दूजे के लिए,
चाहत में हर कोई अपनों को पाने की,

छोटे छोटे से परिवारों में बंधा हर कोई,
हठ सभी की बैठ आँगन में बतियाने की,,

गुजारिश है “मनी” की भुला कर ईष्या को,
कोशिश करो सभी प्रेम का बाग़ सजाने की,

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MANINDER singh
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मनिंदर सिंह "मनी" पिता का नाम- बूटा सिंह पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब. पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है | जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ | मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया में....... cont no-9780533851

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2 comments
    • आप जैसी बड़ी लेखिका से सराहा मेरी छोटी सी ग़ज़ल को इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका अर्चना जी……आगे भी अपना मार्गदर्शन देती रहे ऐसी बिनती है आप से मेरी………