“प्रीत जिया को दुलराती है” (गीत)

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- गीत

प्रीत जिया को दुलराती है

रात चाँद के साथ बिताकर
रजत चाँदनी मन भाई है।
प्रमुदित मन से उन्मादित हो
रजनी ने ली अँगड़ाई है।
अलसाए सपनों से जागी-
कोमल काया मदमाती है।
प्रीत जिया को दुलराती है।।

भोर में रश्मि आच्छादित नभ
भानु के संग इठलाती है।
विरह वेदना सहकर रजनी
नीली चूनर सरसाती है।
तपिश देह की दूर हो गई-
धवल रूपश्री मुस्काती है।
प्रीत जिया को दुलराती है।।

निर्मल जल में नहा प्रेम से
धवल रूप श्रृंगार किया है।
माँग सितारे फूल सजाए
प्रीतम ने आगोश लिया है।
खिली रजत सी कोमल काया-
देख चंद्र मुख इतराती है।
प्रीत जिया को दुलराती है।।

डॉ. रजनी अग्रवाल "वाग्देवी रत्ना"
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी(मो.-9839664017)

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Dr.rajni Agrawal
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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

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