* प्रभु वन्दना * तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ?

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ?

तेरे बिना न कुछ भी मुझको भाता है ,
देखे बिन तुमको नहीं दिल ये बहलता है ।
सोते जागते हर पल तेरा ध्यान रहता है ,
तेरे बिना ये जीवन मुझे सुना लगता है ।।

तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ?

तेरे भजन में मुझको आनन्द आता है ,
देखे बिन तुमको नहीं दिन ये गुजरता है ।
तेरे सुमिरन बिन नहीं चैन मिलता है ,
बस तेरी भक्ति में दिल मेरा रमता है ।।

तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ?

हर पल नाम तेरा, मेरा मन ये ध्याता है ,
देखे बिन तुमको नहीं दिल ये लगता है ।
देख के महिमा तेरी दिल खुश हो जाता है ,
प्रभु तेरी लीला दिल समझ न पाता है ।।

तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ?

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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