प्रकृति

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- गीत

प्यार देकर प्रकृति मुस्कुरा-सी रही
गीत गाकर दिलों को लुभा-सी रही

देख लो बाग़ की मोहनी हर झलक
दिल सुगंधी हवा से घिरा अब तलक
गुण-सुधा में मुहब्बत नहा-सी रही
प्यार देकर प्रकृति मुस्कुरा-सी रही
गीत गाकर दिलों को लुभा -सी रही

देखो भँवरे वहाँ गीत गा झूमते
फूलों के कपोलों को भी चूमते
रति-मदनमय अदा गुदगुदाती-सी रही
प्यार देकर प्रकृति मुस्कुराता-सी रही

कड़कडाती हुई बिजलियों का गगन
डर दिखा भर रहा है दिलों में अमन
और वर्षा मिलन-मग बना-सी रही
प्यार देकर प्रकृति मुस्करा-सी रही
गीत गाकर दिलो को लुभा-सी रही
………………………………………….

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता

आकाशवाणी छतरपुर के कार्यक्रम अधिकारी श्री शेखर शर्मा जी के कहने पर मैने उक्त गीत लिखा तथा आकाशवाणी छतरपुर पर काव्यपाठ की रिकार्डिंग हुई
बाद में 17-07-2017को उक्त रचना के काव्यपाठ का आकाशवाणी छतरपुर से काव्यसुमन कार्यक्रम में प्रसारण हुआ|

02-09-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

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