प्रकृति

Bikash Baruah

रचनाकार- Bikash Baruah

विधा- कविता

उफ ये बारिश
रुकने का नाम
कमबख्त नही लेता,
न जाने कितने दिनो से
लोग घर से बाहर
या बाहर शिविर से
घर आ या जा
नही कर पा रहे,
चारो तरफ हाहाकार
पानी ही पानी
फिर भी एक बुन्द
पानी के लिए
तरस रहे है आदमी,
शायद प्रकृति हमसे
रुठ गई है,या
उसकी भी अंतरात्मा
मर गई है,तभी तो
चुप्पी साधे बैठी है
अनगिनत जीव की
मौत होने के बावजूद ।

Sponsored
Views 5
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Bikash Baruah
Posts 84
Total Views 468
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia