प्रकृति ने ही हमें दिया , जल जैसा उपहार,

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- दोहे

प्रकृति ने ही हमें दिया,जल जैसा उपहार,
हम हरियाली काट कर,मिटा रहे श्रृंगार

आसमान को ताकते , बेबस से ये नैन
गर्मी से झुलसा बदन , खोया मन का चैन

नदियों के इस देश में , प्यासी सी अब प्यास
बड़ी दरारे अब लिए , दिखती धरा उदास

अब आँखों की भीगती , नहीं दर्द से कोर
नफरत लालच स्वार्थ के, इसमें बैठे चोर
डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
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