प्यार की बारिश हो जाये/मंदीप

Mandeep Kumar

रचनाकार- Mandeep Kumar

विधा- कविता

प्यार की बारिश हो जाये/मंदीप

चारो तरफ प्यार की बारिश हो जाये,
हर एक कली फूल बन जाये।

मिटा दो अब सभी फासले,
दो दिल अब एक हो जाये।

मत हार देख तुम दरिया को,
कर बरोसा खुद पर हर दरिया पार हो जाये।

सिख ले एक दूसरे से सभी,
हर एक आदमी इंसान बन जाये।

ना ले अगर हम दहेज किसी से,
किसी की बेटी आत्महत्या ना करने जाये।

साथ ना दे कभी झूठ का,
एक बार फिर राम राज आ जाये।

हो अगर दिल में प्यार ,
दो सरहदे एक हो जाये।

“मंदीप” बोल हमेसा प्यार की भाषा,
फिर इंसान तो क्या जानवर भी दोस्त बन जाये।

मंदीपसाई

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Mandeep Kumar
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नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का बखान करेगी।और जब वो रूठता है तो मै मेरे दिल का बखान करूँगा।हा पर बहुत अच्छा है वो और मेरे दिल में उस के लिए खास ही जगह है ।जहाँ तक कोई पहुँच भी नही पायेगा। मेरा दिल जरूर दुःखता है पर मेरा दिल उसे बार बार माफ़ कर देता है।

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