प्यार की दुनिया बसानी रह गई

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

बात जो दिल की बतानी रह गई
प्यार की दुनिया बसानी रह गई

चाँद तारों साथ महकी रात भर
अब अकेली रात रानी रह गई

दूसरों की पूरी करते रह गए
आखिरी अपनी कहानी रह गई

प्यार से अपने बिछड़ ये ज़िन्दगी
बोझ की बस राजधानी रह गई

ये अँधेरे इसलिए इतने घिरे
रौशनी इनको दिखानी रह गई

देखकर अपराध धोखे हर तरफ
अब यहाँ बस सावधानी रह गई

इस बदलते वक़्त के सँग अर्चना
अब मुहब्बत कब पुरानी रह गई

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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2 comments
  1. वाह्ह्ह्ह्ह्ह बहुत खूब सूरत गज़ल