प्यारे पापा को सस्नेह समर्पित

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

हम तो हैं इक अंश आप का,
आप से मिला ये तन, ये काया।।
पहला कदम पहला शब्द,
आपसे ही हमने पाया।।
पल- पल मिलती रही हमें,
आपके प्यार की ठंडी छाया।।
जग के दर्दीले झंझावातों से,
हमें बचाया, खुद दुःख पाया।।
जिन्दगी की जद्दोजहद में,।
आप ने चलना सिखलाया।।
दुनिया क्या है सही – गलत का,
भेद आप ने समझाया।।
प्यारे पापा स्नेह आपका,
रग – रग में हमारे है समाया।।
साक्षात् न सही पर आज भी,
हमें संभाल रहा है
पापा आप का ही साया।।

—–रंजना माथुर दिनांक 18/06/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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