बचपन और पेड़

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
पेड़ सा ना कोई हितकारी,
खाते थे फल करते सवारी।
🌹
माँ की गोद सा हर एक डाली,
सुखमय ममता सी हरियाली।
🌹
दे दो छुटपन की वो मारामारी,
ना भाती थी बंगला ना गाड़ी।
🌹
पेड़-सा निस्वार्थ मन की क्यारी,
खिले थे हर चेहरे प्यारी-प्यारी।
🌹
शुद्ध हवा और अमृत बरसाती,
पेड़-सा दूजा ना कोई उपकारी।
🌹
इन पर रहते पक्षी ढेर सारी,
इनसे सजते जीवन हमारी।
🌹
मत काट इसको मार कुल्हाड़ी,
पेड़ हैं हर खुशियों की प्रहरी।
🌹
लौटा दो वो बचपन हमारी,
एक पेड़ लगाओ हर दुआरी।
🌹🌹🌹🌹-लक्ष्मी सिंह 💓☺

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 189
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 173
Total Views 78.8k
MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia