पृथ्वी दिवस पर

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

खनिज लवण जल दे रहा,मानव को वरदान !
पृथ्वी पिंड विशाल यह, लगता मातु समान !!

लगी केंद्र में आग है , फिरभी बाँटे नीर !
पृथ्वी इस ब्रम्हांड का, है ग्रह एक अमीर !!

कहीं प्रदूषण वायु का, कहीं रसायन खाद !
सारे मिलकर कर रहे ,.पृथ्वी तल बर्बाद !!

जिसको भी मौका मिला,दिया उसी ने खोद!
सबको रखे सम्हालकर,पर धरती की गोद!!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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