पूछूँगा ईश्वर से

purushottam sinha

रचनाकार- purushottam sinha

विधा- कविता

सांसों के प्रथम एहसास से,
मृत्यु के अन्तिम विश्वास तक तुम पास रहे मेरे,
पूजा के प्रथम शंखनाद से,
हवन की अन्तिम आग तक तुम पास रहे मेरे,
पर क्युँ टूटा है अब ये विश्वास,
क्युँ छोड़ गए तुम साथ,
अंधियारे में जीवन के उस पार तुम क्युँ साथ नहीं हो मेरे?

जीवन मृत्यु के इस द्वंद में,
धडकनों के मध्य पलते अन्तर्द्वन्द में तुम पास रहे मेरे,
गीतों के उभरते से छंद में,
आरोह-अवरोह के बदलते से रंग मे तुम पास रहे मेरे,
पर क्युँ बदला है अब तुमने राग,
क्युँ छोड़ गए तुम साथ,
जीवन की अन्तर्द्वन्द के उस पार तुम क्युँ साथ नहीं हो मेरे?

अब दोष किस किसका दूँ मैं,
सदैव ईश्वर में करती अनन्त विश्वास तुम पास रहे मेरे,
चन्दन, टीका, टिकली, सिन्दूर से,
टटोलती हर पल हृदय के तार सदा तुम पास रहे मेरे,
पर क्युँ विधाता को न आई ये रास,
क्युँ छोड़ गए तुम साथ,
ईश्वर से पूछूँगा जीवन के उस पार तुम क्युँ साथ नहीं हो मेरे?

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purushottam sinha
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