राष्ट्र की पीड़ा

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- दोहे

दुःख-दरद के संग में, दिखी भूख की पीर|
कैसे बोले राष्ट्र का, पीड़ित नहीं शरीर||

देख हाल निज राष्ट्र का, रोता हृदय बृजेश|
दीन हीन लाचार को, क्यों देते हो क्लेेश||

वह सहते संताप जो दें निर्धन को शूल|
राष्ट्र-अमन सद्ज्ञान है सब धर्मों का मूल||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषिआलोक" कृतियों के प्रणेता

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Brijesh Nayak
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-नाम-बृजेश कुमार नायक -पता-सुभाष नगर कोंच उ.प्र.285205 -E mail-brijeshkumarnayak1961@gmail.com -मोः9455423376whats app-9956928367 -प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" काव्य संग्रह एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" खण्ड काव्य| (साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित) -सम्मान -अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत| -आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित
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