पीड़ा

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

पीड़ा जब भी आई है ,
नहीं किसी को भाई है ।
हर्षित होकर कोई न उठता ,
अतिथि पीड़ा के स्वागत में ,
फिर भी पीड़ा करती रहती ,
हरदम सबकी मेहमानी ।
राजा हो या रंक सभी में ,
इसका आता एक समय है ।
फिर भी जाने क्यों कर इससे ?
सबको नफ़रत, सबको भय है ।
पीड़ा ऐंसी मित्र कि जिसको ,
नहीं किसी से कोई स्वारथ ,
फिर भी इसकी आगवानी को ,
आगे हाथ न कोई बढ़ता ।
इसका साथ लिया जिस-जिस ने ,
उनको इसने दिया है जीवन ।
पीड़ा के पतझड़ में मित्रो ,
खिलता जाता जीवन-उपवन ।
पीड़ा की ही अनुकम्पा से ,
मीरा को मिलते कान्हा जी ।
शांति मिल जाती जीसस को ,
और बुद्ध​ को मिलती सिद्धि ।
तुम भी अगर अपना लो पीड़ा ,
बड़े प्यार से , बड़े गर्व से ।
तो ये तुम्हारे​ जीवन में भी ,
करती रहेगी हरपल हरदम ,
नये-नये अनुभव की वृद्धि ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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