पिता

MONIKA MASOOM

रचनाकार- MONIKA MASOOM

विधा- कविता

पिता जीवन की शक्ति है,जन्म की प्रथम अभिव्यक्ति है,
पिता है नींव की मिट्टी,जो थामे घर को रखती है

पिता ही द्वार पिता प्रहरी ,सजग रहता है चौपहरी
पिता दीवार पिता ही छत, ज़रा स्वभाव का है सख्त

पिता पालन है पोषण है, पिता से घर में भोजन है
पिता से घर में अनुशासन, डराता जिसका प्रशासन

पिता संसार बच्चों का, सुलभ आधार सपनों का
पिता पूजा की थाली है, पिता होली दिवाली है

पिता अमृत की है धारा , ज़रा सा स्वाद में खारा
पिता चोटी हिमालय की, ये चौखट है शिवालय की

हरि ब्रह्मा या शिव होई, पिता सम पूजनिय कोई
हुआ है न कभी होई, हुआ है न कोई होई

Sponsored
Views 33
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
MONIKA MASOOM
Posts 8
Total Views 172

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia