पानी

Bikash Baruah

रचनाकार- Bikash Baruah

विधा- कविता

कहीं पर बूंद बूंद
पानी के लिए तरस रहे
लोगों की कतार दिखाई देती,
तो कहीं लोग बेझिझक
व्यर्थ में ही उसे जाया करती;
कुछ लोग पानी की
अस्तित्व जान कर इसे
अमृत समान मानते ,
कुछेक इसे केवल
अपनी प्यास बुझानेवाली
साधारण पदार्थ समझते;
अब मिल रहा है तो
इसका मोल सभी
समझ नहीं रहे,
सोचो जब मुश्किल
होगा इसका मिलना
हम तब क्या करेंगे?

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Bikash Baruah
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मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।

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