पहाड़ों के दरमियाँ एक नदी बहती हुई

आनंद बिहारी

रचनाकार- आनंद बिहारी

विधा- गज़ल/गीतिका

💐हिमाचल की यादें ताज़ा करती रचना💐

पहाड़ों के दरमियाँ, एक नदी बहती हुई
हिरणी-सी चलती गई सर्दियां सहती हुई-1

पानी की लहरें हो, या छलकता पैमाना
शायद दिल की लगी, बयां करती हुई-2

पेड़-पर्वत-नदियों ने ओढ़ी बर्फीली चादरें
बर्फ से बचने के लिए बर्फ में रहती हुई-3

सुना,अनसुना किया, मैंने नदी की सदा
औ'नदी बढ़ती रही बहती रही कहती हुई-4

ये पहाड़ी रास्ते क्या मंजिलों तक जाएंगे?
ख्वाहिशों की सदा दिल से चली रहती हुई-5
©आनंद बिहारी, चंडीगढ

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आनंद बिहारी
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गीत-ग़ज़लकार by Passion नाम: आनंद कुमार तिवारी सम्मान: विश्व हिंदी रचनाकार मंच से "काव्यश्री" सम्मान जन्म: 10 जुलाई 1976 को सारण (अब सिवान), बिहार में शिक्षा: B A (Hons), CAIIB (Financial Advising) लेखन विधा: गीत-गज़लें, Creative Writing etc प्रकाशन: रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित FB/Tweeter Page: @anandbiharilive Whatsapp: 9878115857

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4 comments
  1. प्रकृति के सानिध्य में लक्ष्य प्राप्ति का संकेतात्मक संदेश देती अतिसुंदर ग़ज़ल ।