पहली बार

बसंत कुमार शर्मा

रचनाकार- बसंत कुमार शर्मा

विधा- लघु कथा

पहली बार
© बसंत कुमार शर्मा, जबलपुर
*
सेठ रामलाल बड़ा सा बैग लेकर तेजी से घर से निकले. एक खाली रिक्शे को अपनी ओर आते देखकर उनकी बांछें खिल गयी. रिक्शे में बैठ कर मंजिल की ओर चल दिए, रिक्शे वाले से उन्होंने नोट बंदी के असर के बारे वार्ता शुरू की और धीरे-धीरे उससे दोस्ती का प्रयास करने लगे. थोड़ी देर बाद बोले, अरे भाई हमारी कुछ मदद कर दो.

रिक्शेवाला बोला, हाँ साहब! कहिये मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?.

सेठ जी बोले, इस बैग में २ लाख रुपये के हाजर-पाँच सौ के पुराने नोट हैं. तुम इन्हें अपने जन-धन खाते में जमा कर लो. बीस हजार रुपये कमीशन काटकर मुझे चैक दे देना. मैं अपने खाते में जमा कर लूँगा.

रिक्शेवाला बोला, सेठ जी हमारा काम तो रोज कमाने-खाने से ही चल जाता है. कमीशन खाने और पचाने की आदत होती तो मैं रिक्शे की अगली सीट पर क्यों बैठा होता?

बैग में पड़े हजारों के नोट भुनभुना रहे थे और रिक्शेवाले की जेब में दस का नोट मंद-मंद मुस्कुरा रहा था, जिन्दगी में पहली बार……

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 2
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
बसंत कुमार शर्मा
Posts 78
Total Views 1k
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia