पहली बार

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

वादा किया है जिन्दगी से मैने पहली बार
करना नही पड़ेगा अब उसे और इन्तजार
ले जाऊंगा उसे मै सपनो के द्वार
महकेगी जब जिन्दगी पतझड़ भी हो जायेगा बहार ।

होगी नही उसकी अब कभी हार
राह मे कितने भी हो पत्थर हजार
दोड़ेगी हवा मे, झेलेगी जिन्दगी
हर बदलते मौसम की मार ।

देखकर जनून जिन्दगी का
आयेगी मंजिल खुद ही हो के बेकरार
गूंजेगा नगाड़ा जब जिन्दगी का
इशारा कर हर दिशा करेगी इकरार ।

बदलते तेवर देख जिन्दगी के
खुदा भी बदलेगा तकदीरे यार
रोके नही कदम अगर यमराज ने
हार जायेगी मौत जिन्दगी से पहली बार ।।

राज विग

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