पहला लोटा शौच का

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- दोहे

शौचालय से हो रहा है पानी का नाश|
जल ही जीवन है,सबको है विश्वाश||

पहला लोटा शौच का,दूजा बुझाये प्यास|
एक बाल्टी पानी मे, कपड़े फसक्लास||

पानी पानी सब कहते है पानी से सब आस|
विन पानी सब सून है तन है खाली लास||

नदी बेचारी सूख गई,बर्षा पर विश्वास |
जीव जॉतु पशु मोर पपीहा,सब लगाये आस||

नोट बंदी ने ले लई है रे सबकी जान |
कछु दिना मे मोदी जी ने कर दओ है कल्यान||

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कृष्णकांत गुर्जर
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संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303
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