पश्चाताप ( कविता)

Onika Setia

रचनाकार- Onika Setia

विधा- कविता

पश्चाताप (कविता)

एक दिन सोचा मैनेें,
एकांत में बैठकर।
क्या खोया जीवन में,
और क्या पाया अब तक।
मूल्यांकन ना कर सके,
न किया विचार अब तकें।
एक ख़ुशी के इंतज़ार में,
सारी उम्र गुज़र गयीें।
जिंदगी रेत की तरह,
हाथ से फिसल गयी।
एक स्वप्न नगरी में घूमते रहे,
किसी की हाथों में हाथ डालकर।
मगर जब आँख खुली तो,
दिल बहुत रोया यह जानकर।
कैसी ख़ुशी ! कैसा साथी !,
यह तो मात्र मेरा भ्रम था।
भुला रखा था खुद को मैने,
यह मेरा कैसा पागलपन था।
जीवन के अंतिम पड़ाव में जब,
रह गए है बस चंद श्वास।
ऐसे समय में जो कुछ शेष है,
और मेरा मात्र पश्चाताप ।

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Onika Setia
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नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं द्वारा रचित चेतना ब्लॉग , और समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेखन -कार्य , आकाशवाणी इंदौर केंद्र से कविताओं का प्रसारण .

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