पर्व राष्ट्रीय जब भी आते, यूँ तो सभी मनाते हैं

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

पर्व राष्ट्रीय जब भी आते, यूँ तो सभी मनाते हैं
पर ऐसा लगता है जैसे,केवल रीत निभाते हैं

देखा जीवन मे खुद करते, अम्ल नहीं उन बातों पर
बड़ी बड़ी जो बातें अपने, भाषण में कर जाते हैं

सीमा पर तो दुश्मन की हम , ईंट से ईंट बजा देते
बेबस पर रह जाते जब ये,घर में कहर मचाते है

देश खा रहे दीमक जैसे, जाति ,धर्म ये आरक्षण
इनका तूल बनाकर नेता, अपने वोट भुनाते हैं

भ्रष्टाचार यहां फैला है, अब लोगों की रग रग में
चपरासी से अफसर तक सब, रिश्वत की ही खाते हैं

व्यापारी भी लाभ कमाने,देश को अपने भूल गये
नकली दस्तावेज़ बनाकर,अपना टैक्स बचाते हैं

आज देश की बदहाली का एक बड़ा कारण ये भी
करें नहीं खुद हम कुछ भी बस, सबके फ़र्ज़ गिनाते हैं

हिंदू मुस्लिम सिक्ख इसाई,सब हो जायें एक 'अर्चना'
देश प्रेम की आओ सबमें ,फिर से जोत जगाते हैं

डॉ अर्चना गुप्ता
05-08-2017

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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