परेशान तन है ……..

Awneesh kumar

रचनाकार- Awneesh kumar

विधा- कविता

परेशान तन है
बेचैन मन है

उलझन में जान है
बहुत परेशान है

पत्तो सा टूट रहा हु
किसी बंधन सा छूट रहा हु

तिल-तिल मर रहा हु
घुट-घुट कर जी रहा हु

कुछ ना किया तो हार है
कुछ किया तो जीत कर भी हार है

कैसी ये मजधार
आँखों में आँशु की धार है
मन बहुत परेशान है।(अवनीश कुमार)

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Awneesh kumar
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नमस्कार अवनीश कुमार एक नया रचनाकार (आप के आशिर्वाद का आकांछी)
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