परिवर्तन की लहर चली है

विजय कुमार अग्रवाल

रचनाकार- विजय कुमार अग्रवाल

विधा- कविता

परिवर्तन की लहर चली है भ्रष्टाचार है पहला निशाना ।
क़दम से क़दम मिलाना होगा तभी तो होगा आगे जाना ॥
कठिनाई तो आती ही है जनता को है यह समझाना ।
आपका पैसा आपका ही है सिर्फ लुटेरे बने निशाना ॥
बेंक वाले सब भाई बंधु है इनका हमको साथ निभाना ।
परेशान होकर लाइन से नहीँ बनाओ इन्हे निशाना ॥
सुबहा आठ से शाम आठ तक छुट्टी में भी कार्य कराना ।
देश के हित में लिये निर्णय का हर हालत में साथ निभाना ॥
सब कुछ हम पर ही निर्भर है इस संकट से पार है पाना ।
हर संकट का है इलाज संयम और हिम्मत हमें बताना ॥
कठिन समय दस पंद्रह दिन का फ़िर आयेगा समय पुराना ।
देश बने सोने की चिड़िया फ़िर से सबको यही बताना ॥
हम है शिल्पकार भारत के हमें है इसको स्वच्छ बनाना ।
आओ कसम लें हर हालात में है मोदी का साथ निभाना ॥

विजय बिज़नोरी

Views 61
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
विजय कुमार अग्रवाल
Posts 32
Total Views 1.4k
मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia