परिन्दे

कवि कृष्णा बेदर्दी

रचनाकार- कवि कृष्णा बेदर्दी

विधा- गज़ल/गीतिका

टूटे हुए हम ऎसे परिन्दे है जिनकी न कोई कहानी हैं,

जीते हम तो मगर न मेरी कोई जिन्दगानी हैं,

जीत चुके हैं वो बाजी, फिर भी हम हारे हुए हैं,

गम में इतना टूट चुके हैं,खुशिया मेरे गम पर रोती,

जीवन का ऎ कैसा मोड़ है दर्द हमसे हैं शर्माती,

पग-पग चलता हूँ फिर भी न कोई हैं

मंजिल मेरी,

पल-पल याद में तेरे मरता न हैं कोई चाहत मेरी,

सुबह-शाम तुझको निहारु, फिर भी कोई रूप नही,

उगता सूरज आसमान में पर मुझपे हैं धुप नही,

कौन है अपना कौन पराया अब कोई उम्मीद नही,

जीता था मैं तेरे लिए अब मेरा कोई वजूद नही ,

जिन्दा हूँ की मुर्दा हूँ ऎभी हैं एहसास नही,

चिता है जलती रोज यहाँ पर कोई शमशान नही,

मन्दिर-मस्जिद बहुत बने' न ही खुदा भगवान यहाँ

साँस-साँस में तू है बसी'तेरे सिवा कोई और कहाँ ,

साँसे भी कहती हैं छोड़ समुन्दर पार चलो,

नही हैं अपना कोई यहाँ'
अब अपने यार के पास चलो,,,

अब अपने यार के पास चलो,,,,,,,;

Sponsored
Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कवि कृष्णा बेदर्दी
Posts 69
Total Views 167
कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia