पथिक वही जो बढ़ता जाता

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

पथिक वही जो बढ़ता जाता
अवरोधों से कब घबराता ,
ऊँची-नीची सब राहों पर
बिना रुके वो चलता जाता ।
पाषाणों से जब टकराता
असंभव को संभव बनाता ,
बड़े बड़े तूफाँ से लड़कर
विजय रथ पर चढ़ता जाता ।

डॉ रीता

Sponsored
Views 41
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Rita Singh
Posts 86
Total Views 3.5k
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia