पति परमेश्वर से कुछ ज्यादा

योगिता

रचनाकार- योगिता " योगी "

विधा- मुक्तक

अब तुम,
पति परमेश्वर से
कुछ ज्यादा
दोस्त हो गए हो मेरे ,
जैसे किसी
बचपने से
निकल रहा है
हमारा रिश्ता,
और ले रहा है ,
एक नया मोड,
जिसमें हम
अधिक सहज और
अधिक स्वाभाविक हैं।
तुम्हें मेरी परवाह है
ये मैं जानती हूं
और तुम मेरे सब कुछ हो,
ये पता है तुम्हें ।
अब तुम्हें रिझाने के लिए
किसी सौंदर्य प्रसाधन
की जरूरत नही
महसूस होती है मुझे,
बस चाहती हूं
कि मेरा तुम्हारे प्रति प्रेम ही
सौंदर्य बने मेरा,
और मेरी शीतलता
ही हो मेरा अलंकार,
घर में पायल की रुमझुम
हो न हो
पर खनकती रहे
हंसी की खनक
और मधुर मुस्कान ही
हो सच्चा शृंगार,
तुम अब
पति परमेश्वर से
कुछ ज्यादा
दोस्त हो गए हो मेरे

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योगिता
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कर्तव्य से प्रशासनिक अधिकारी एवं हृदय से कला प्रेमी।आठ वर्ष की उम्र से विभिन्न विधाओं में मंच पर सक्रिय । आकाशवाणी में युवावाणी कार्यक्रम में कविता पाठ,परिचर्चा में अनेक कार्यक्रम प्रसारित। भिन्न भिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में लेख व कविता प्रकाशित। साहित्यपीडिया के माध्यम से पुन: कला से और कलाकारों से जुडने के लिए हृदय से आभारी हूं ।

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